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‘दिलों के मैल धोने को यहां गंगा का पानी है’, काशी में गंगा की लहरों पर मुशायरा और कवि सम्मेलन

‘दिलों के मैल धोने को यहां गंगा का पानी है’, काशी में गंगा की लहरों पर मुशायरा और कवि सम्मेलन

युवाओं में साहित्य-संस्कृति के प्रति लगाव के लिए काशी के नौजवानों की पहल

4 Jan 2021
वाराणसी। काशीलाइव (Kashilive.com)

अस्सी घाट पर गंगा की लहरों के बीच सोमवार की सुबह बजड़े पर दिलकश शायरी और काव्य प्रस्तुति का दौर चला। सामाजिक कार्यकर्ता राज सिद्दीकी की पहल पर ख्यात शायरों व कवियों ने अपनी रचनाओं से काशी की जिंदादिली को रवानी दी। 

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शहज़ादा कलीम ने पढ़ा, ‘हमारे देश की मिट्टी में है ख़ुशबू मुहब्बत की, दिलों के मैल धोने को यहां गंगा का पानी है...'। वहीं रेहान हाशमी ने 'ये काम फ़राएज़ की तरह हमने किया है, जब-जब वतन ने मांगा लहू हमने दिया है...' कलाम से श्रोताओं को देशभक्ति के जज्बे से ओत-प्रोत किया। 

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वहीं डा. शाद मशरिकी ने 'लिक्खा है मुक़द्दर में अगर धूप में जलना, दामन में दरख़्तो के भी साया नहीं होता...'  से मुशायरे को नया आयाम दिया। इस दौरान अमित गुप्ता, ज़मज़म रामनगरी, डॉ अशोक अज्ञान, रामिश जौनपुरी आदि ने भी कलाम पेश किए। कार्यक्रम का संचालन निजाम बनारसी एवं धन्यवाद ज्ञापन रेहान हाशमी ने किया।



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