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मोक्षधाम मणिकर्णिका की अंतिम यात्रा में भी ट्रैफिक जाम, इस समस्या से बदनाम है बनारस

मोक्षधाम मणिकर्णिका की अंतिम यात्रा में भी ट्रैफिक जाम, इस समस्या से बदनाम है बनारस

ठंड में बढ़ी शवदाह की संख्या, मणिकर्णिका से सिंधिया घाट तक तंग गलियों में वाहनों की कतार

वाराणसी। काशीलाइव (Kashilive.com)

मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान शंकर की पत्नी माता पार्वती की मणि यहां गिरी थी। यहां दाह संस्कार करने से सीधे मोक्ष की प्रप्ति होती है। काशी के मणिकर्णिका घाट की आग कभी ठंडी नहीं, इसीलिए यहां 24 घंटे शव दाह होता है।

तंग गलियों में ट्रैफिक जाम:

शवदाह को आने वाले लोगों को इस समय मणिकर्णिका की तंग गलियों में खासी मुश्किलें झेलनी पड़ रही। मणिकर्णिका से सिंधिया घाट तक दो पहिया वाहनों की कतार के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। बनारस वैसे ही ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम है। मोक्षधाम की गलियों में भी अब ट्रैफिक जाम से मुक्त कराना पुलिस- प्रशासन के लिए चुनौती बनकर खड़ा है। 

अतिक्रमण की चपेट में मोक्षधाम:

मणिकर्णिका की तंग गलियों में चिता की लकड़ी का कारोबार करने वालों ने गलियों में अतिक्रमण कर रखा है जिसके चलते परेशानी खड़ी हो रही।



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