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... तो पूर्वांचल के इन दो बाहुबलियों में चलती है असली कालीन भईया बनने की जंग

... तो पूर्वांचल के इन दो बाहुबलियों में चलती है असली कालीन भईया बनने की जंग

Kashi Live/ Anurag Srivastav

सस्पेंश, एक्शन, सेक्स, गाली व गोलियों से भरी वेब सीरीज मिर्जापुर सीजन-2 आते ही दर्शकों में छा गई। पूर्वांचल के गैंगवार पर बनी इस वेब सीरीज को लोगों ने काफी पसंद किया। मिर्जापुर के हर किरदार ने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। चाहे वह अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया हो, या उनके बेटे फूलचंद त्रिपाठी उर्फ मुन्ना भइया, चाहें वह हो गुड्डू, बबलू, गोलू व स्वीटी। सबने अपने अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। हाल ही में मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने वेब सीरीज को लेकर आपत्ति जताई थी कि उनके जिले की छवि खराब की जा रही। लेकिन जरायम की दुनिया में पूर्वांचल के बाहुबलियों में हमेशा से मिर्जापुर पर वर्चस्व स्थापित करने की जंग चल रही।   

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कहानी थोड़ी फिल्मी तो थोड़ी रियल- 

पूर्वांचल के दो बाहुबली हैं जो विंध्य की पहाड़ियों पर अपना वर्चस्व स्थापित करने में जुटे हैं। दोनों में हमेशा गैंगवार को लेकर अंदेशा रहता है। मिर्जापुर - सोनभद्र की सीट के लिए ये दोनों बाहुबली आमने-सामने रहते हैं। दोनों ही सीटों पर इनके ही परिवार का कोई न कोई सदस्य चुनाव लड़ता है, और हमेशा रहता है रियल के ठांय-ठांय का अंदेशा। 

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तो यह हैं दोनों बाहुबली, जिनको चाहिए मिर्जापुर की गद्दी

मिर्जापुर के असली किंग के लड़ाई में भदोही के ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा और पूर्व विधायक विनीत सिंह के बीच हमेशा लड़ाई रही है। इस सीट पर साल 2017 के चुनाव में विजय मिश्रा ने अपनी पत्नी रामलली मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारा था। वहीं, विनीत सिंह अपने भाई त्रिभुवन नारायण सिंह को। रामलली को जहां समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था, तो वहीं त्रिभुवन नारायण को बसपा ने। 

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इनकी हुई थी जीत

चुनाव में रामलली मिश्रा की जीत तो हो गई थी। लेकिन, विजय मिश्रा और विनीत सिंह में ये अदावत अब भी जारी है। कहा जा रहा है कि विजय मिश्रा के ऊपर आरोप लगने की कवायद शुरू हुई है, उसमें कहीं न कहीं आने वाले साल में मिर्जापुर-सोनभद्र सीट पर होने वाला चुनाव ही है। पिछले चुनाव में मामला जिस तरह री-काउंटिंग तक पहुंचा था और असलहों के साथ हंगामा हुआ था, वह भी किसी से छिपा नहीं है।

ऐसे में इन दो बाहुबलियों के बीच भी मिर्जापुर किसका होगा, उसकी लड़ाई जारी है। चुनावी बिसात पर दो बाहुबली जिस तरह अपनी-अपनी प्रतिष्ठा फंसाते हैं। उससे गैंगवार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हर चुनाव के दौरान तनाव बढ़ता है और फिर पूरे 5 साल खींच-तान, आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है।

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एके-47 व जाली नोट लेकर घुमते हैं यह बाहुबली !

पिछले चुनाव में विनीत सिंह ने आरोप लगाया था कि विजय मिश्रा उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। उनका दावा था कि विजय मिश्रा अपनी गाड़ी में एके-47 और जाली नोट लेकर घूम रहे हैं। वह किसी को धमका रहे हैं तो किसी को खरीद रहे हैं। बीडीसी और प्रधानों को भी धमकाने का आरोप लगाया था। वहीं दूसरी तरफ विजय मिश्रा ने विनीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि विनीत सिंह उनकी हत्या कराना चाहते हैं। उन्हें मोबाइल पर जान से मारने की धमकी भी दी है। उन्होंने बाहर से फोर्स बुलाकर चुनाव कराने की मांग की थी। कुल मिलाकर दोनों ही गुट एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में दोनों बाहुबलियों का लक्ष्य एक है, और वह है मिर्जापुर।

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विनीत गए कोयले के कारोबार में 

विनीत सिंह पूर्वांचल में काफी लंबे समय से सक्रिय हैं। लेकिन, कहा जा  रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने झारखंड के धनबाद में भी अपनी पकड़ बना ली है। कोयले के कारोबार में वह उतर चुके हैं और उससे काफी कमाई कर रहे हैं। विनीत सिंह का सियासी सफर बसपा से जरूर शुरू हुआ, लेकिन इस समय वह बीजेपी में हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में मतदान से तीन दिन पहले वह बीजेपी में शामिल हुए थे। जिससे बीजेपी को चंदौली लोकसभा सीट पर फायदा हुआ था। बता दें कि विनीत सिंह साल 2010 में मिर्जापुर से एमएसली रह चुके हैं। वह शुरू से एक काफिले के साथ चलते हैं।
 



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