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ज्ञानवापी मामला: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील को बनारस की अदालत में मांगनी पड़ी माफ़ी, 3 को फैसला

ज्ञानवापी मामला: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील को बनारस की अदालत में मांगनी पड़ी माफ़ी, 3 को फैसला

वाराणसी। काशीलाइव

काशी विश्वनाथ धाम परिसर में मौजूद ज्ञानवापी में नए मंदिर निर्माण, हिंदुओं को पूजा-पाठ के अधिकार आदि को लेकर वर्ष 1991 को दायर मुकदमे के मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल याचिका पर बहस पूरी हो गई। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) के निर्णय के खिलाफ जिला जज उमेशचंद्र शर्मा की अदालत में निगरानी याचिका दायर करने में विलंब के लिए क्षमा मांगनी पड़ी। बहस के दौरान अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए लॉकडाउन, ग्रीष्मावकाश तथा व्यक्तिगत व्यस्तता की वजह से निगरानी याचिका दायर को विलंब का कारण बताया। अधिवक्ता ने परिसीमा अधिनियम की धारा का हवाला देते हुए विलंब से याचिका दायर करने के लिए क्षमा मांगी।

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वाद मित्र ने जताई आपत्ति, तीन को अदालत देगी निर्णय:

अयोध्या के बाद काशी-मथुरा को भी लेकर आवाज जोर-शोर से उठने लगी है। ज्ञानवापी को लेकर दायर मुकदमे में सुन्नी सेंटल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र पर प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से वादमित्र ने आपत्ति जताई। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों तथा नजीरों का हवाला देते हुए विरोध जताया। दलील दी कि विलंब माफी का कारण अपर्याप्त है। किसी भी आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका दायर करने के लिए 90 दिन की समयावधि होती है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने लगभग 206 दिनों बाद निगरानी याचिका दायर किया है। ऐसे स्थिति में याचिका स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। वाराणसी की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कहा कि तीन अक्टूबर को वह इस मामले में अपना निर्णय सुनाएंगे।

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अदालत के क्षेत्राधिकार को दी थी चुनौती:

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मुकदमे की सुनवाई करने के सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) के क्षेत्राधिकार को लेकर चुनौती दी थी। सिविल जज ने 25 फरवरी 2020 को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की चुनौती को खारिज कर दिया था। सिविल जज के निर्णय के काफी दिनों बाद 18 सितंबर 2020 को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तौहिद खान ने निगरानी याचिका दायर किया जबकि अंजूमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से ग्रीष्मावकाश बाद एक जुलाई को निगरानी याचिका दायर किया जा चुका था।



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