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भूख हड़ताल पर बैठे अभिभावक, पुराने और नकली आदेश दिखाकर की जा रही जबरन फीस वसूली

भूख हड़ताल पर बैठे अभिभावक, पुराने और नकली आदेश दिखाकर की जा रही जबरन फीस वसूली

चंदौली। काशीलाइव (Kashilive.com)

पीडीडीयूनगर: वैश्विक महामारी कोरोना काल में निजी स्कूलों की फीस वसूली के विरोध में अभिभावकों का आंदोलन अब धीरे-धीरे भूख हड़ताल का रूप ले लिया है। इसी क्रम में दीनदयाल उपाध्याय नगर के अभिभावक का एक दल हिनौली स्थित सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल के बाहर भुख हड़ताल पर बैठा। उनका आरोप है कि इस संकट काल में स्कूलों का रवैया अभिभावकों के प्रति तनिक भी उदार नहीं दिख रहा हैं और सरकार भी इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में उन्होंने ‘नो स्कूल-नो फीस’ के तहत ये मुहिम चलाई है।

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पुराने व नकली आदेश दिखाकर जबरन फीस वसूली का आरोप:

कैम्पेन के संयोजक सतनाम सिंह ने बताया कि जहां एक ओर स्कूल प्रबंधक फ़ीस वसूलने के नाम पर नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। वही दूसरी ओर अभिभावकों पर यह स्कूल फीस चक्रवृद्धि ब्याज की तरह बोझिल होता जा रहा है। फीस अब लगान की तरह वसूली जाने लगी हैं। शिक्षा शुल्क में रियायत देने की जगह शासन-प्रशासन का झूठा आदेश व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के पुराने वक्तव्य का हवाला देते हुए स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को डरा व धमका रहा हैं और उनसे सभी प्रकार के चार्ज स्कूल फीस कम्पोजिट फी के नाम पर वसूले जा रहे हैं। 

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फीस माफी के लिए भूख हड़ताल पर बैठे अभिभावक:

सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल के अनशनरत अभिभावकों का कहना हैं की मिशनरी द्वारा संचालित इस स्कूल के प्रति हम अभिभावकों में आशा और विश्वास था कि यह स्कूल अपनी उदारता का परिचय देगा। अभिभावकों के पक्ष में खुद संज्ञान लेकर स्कूल फीस में भारी रियायत देगी तथा स्कूल बन्दी के दौरान के समय पर फीस माफी पर भी पहल करेगी। लेकिन यह स्कूल सेवा शिक्षा के बजाय स्कूल फीस के नाम पर अंग्रेजी लगान वसूलने लगी। जिसके बाद असक्षम अभिभावकों का धैर्य जबाब दे दिया और हम सब भूख हड़ताल कर अपना विरोध दर्ज कराने को विवश हुए।
 



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