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आजमगढ़ में बच्ची से दुष्कर्म के लिए सरकार नहीं परिवार वाले हैं दोषीः बाल संरक्षण आयोग

आजमगढ़ में बच्ची से दुष्कर्म के लिए सरकार नहीं परिवार वाले हैं दोषीः बाल संरक्षण आयोग

 

आजमगढ़ में नौ साल की बच्ची से हुए दुष्कर्म पर बोली राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य

सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने बीएचयू में जाकर जाना पीड़ित बच्ची का हाल

वाराणसी। काशीलाइव

हर घटना में गलती सरकार या प्रशासन की ही नहीं होती। कुछ गलतियां परिवार से भी होती है। आजमगढ़ में नौ साल की बच्ची से हुई दुष्कर्म की घटना भी परिवार की ही गलती से हुई है। यह कहना है कि बनारस पहुंची राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी का। वह बनारस पहुंची थी दुष्कर्म पीड़िता से बात करने।

उन्होंने बीएचयू जाकर दुष्कर्म पीड़िता बच्ची से मुलाकात की। डॉक्टरों से हेल्थ संबंधी जानकारी ली। वह आजमगढ़ में बच्ची के घर भी गई थी। इसके बाद प्रेस से बातचीत में कहा कि घटना के लिए दोषी कोई और नहीं बल्कि घर वालें ही हैं।

क्योंकि पड़ोस में रहने वाला 21 साल का लड़का नौ वर्ष की बच्ची को नहलाने के लिए ले जाता है और वो भी घरवालों की जानकारी में। फिर भी कोई कुछ नहीं कहा। यही नहीं बच्ची के कपड़े मांगने पर परिवारवालों ने कपड़ा भी दे दिया नहाने जाने के लिए। इसलिए हर घटना के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। बल्कि लोगों को खुद भी सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ में जो घटना हुई है उसके लिए वह सरकार को जल्द से जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को कहेंगी।

दिव्यांग बच्चों की ली जानकारी

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने बाल संरक्षण गृह में रह रहे दिव्यांग बच्चों के बारे में दिव्यांग बंधु डॉ उत्तम ओझा से जानकारी ली। डॉ. ओझा ने बताया कि राजकीय बाल संरक्षण गृह में 31 दिव्यांग बच्चे हैं। विकास, शिक्षण-प्रशिक्षण व अन्य सुविधाओं के लिए योजना का क्रियान्वयन करने की बात कही। डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने आदर्श बाल सुधार गृह के रूप में स्थापित करने की बात कही।



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