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एक्सक्लूसिव : तो क्या रामनगर थाने से ट्रक लेकर निकलता था भूत, करवा दिया चालान, जानिए खेल

एक्सक्लूसिव : तो क्या रामनगर थाने से ट्रक लेकर निकलता था भूत, करवा दिया चालान, जानिए खेल

- आरटीओ ने किया कमाल या  अंदरखाने में चल रहा था धमाल

अनुराग श्रीवास्तव । काशीलाइव

पुलिस महकमा और परिवहन विभाग (RTO)  अपने कारनामों से आए दिन सुर्खियों में रहता है। कभी इनकी संवेदनहीनता से कोई आत्महत्या कर लेता है तो कभी पुलिस पीड़ित को ही पीट देती है। ताजा मामला आरटीओ और रामनगर पुलिस के बीच एक ऐसे खेल का है जिसमें कौन सच बोल रहा, जांच का विषय है। दरअसल, आरटीओ ने एक ऐसे ट्रक का चालान किया है जो एक्सीडेंट के एक केस में बीते कई महीनों से रामनगर थाने में खड़ा है। उधर पीड़ित कारोबारी ने कोर्ट में केस याचिका दायर कर पुलिस गंभीर आरोप लगाया है कि रामनगर पुलिस थाने में खड़े ट्रक का इस्तेमाल कर रही थी। सुबूत हाथ में होने पर जब कोर्ट ने जब आख्या मांगी तो रामनगर पुलिस ने ट्रक के उपयोग से इनकार कर दिया। 

सड़क हादसे के बाद पुलिस ने लिया था ट्रक को कब्जे में- 

मीरजापुर जिले के रामपुर गांव निवासी उमेश गुप्ता के पास ट्रक है, जिसका नम्बर UP 65 AR 4729 है। इस ट्रक से मार्च महीने में रामनगर थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना हो गई। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया। तब से लेकर 14 जुलाई तक ट्रक रामनगर थाने के कब्जे में ही रही। 

थाने में गाड़ी, आरटीओ ने भेजा चालान- 
उमेश गुप्ता के होश तब उड़े जब परिवहन विभाग (आरटीओ) की ओर से 15 हजार रुपए का चालान भेजा गया। ट्रक के चालान करने की तिथि 15 जून अंकित थी। उमेश का माथा ठनका क्योंकि ट्रक उस अवधि में पुलिस के कब्जे में थी। अब सवाल उठता है कि जब ट्रक रामनगर थाने के कब्जे में था तो चालान कैसे हुआ। 

कारोबारी ने किया केस, गले की फांस बनेगा चालान

पूरे मामले में पीड़ित उमेश गुप्ता ने कोर्ट में केस किया है। उन्होंने रामनगर पुलिस पर गाड़ी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इसपर कोर्ट ने रामनगर पुलिस से आख्या मांगी। आख्या में रामनगर पुलिस ने लिखकर दिया है कि गाड़ी का कोई व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं हो रहा था। अब चालान कैसे हुआ उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। पुलिस ने 14 जुलाई को गाड़ी प्राप्त करने की रसीद भी कोर्ट में प्रस्तुत की है। पूरे मामले में कोर्ट जल्द ही फैसला सुनाने वाली है। इसमें पुलिस या आरटीओ की गर्दन फंस सकती है। 

टारगेट पूरा करने में तो नहीं हुई गलती- 
अक्सर पुलिस और आरटीओ चालान करने का टारगेट पूरा करने में इस तरह की गलती करती है। कई बार यह देखने में आया है कि घर पर खड़ी गाड़ी का भी चालान पहुंच जाता है। इसकी जानकारी जब गाड़ी मालिक को होती है तो वह विभाग के चक्कर लगाने लगता है। यदि अफसर सही है तो चालान रद होता है नहीं तो मजबूरी में चालान जमा करना पड़ता है।



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