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ये सोनम लुटाती है बेजुबानों पर अपना प्यार

ये सोनम लुटाती है बेजुबानों पर अपना प्यार

अनुराग श्रीवास्तव। काशीलाइव

सोनम गुप्ता याद है आपको, अगर नहीं तो याद करने की कोशिश किजीए। अब भी नहीं याद आ रहा है तो चलिए हम बता देते हैं। नोटबंदी के दौरान नोटो पर लिखी एक सोनम गुप्ता वायरल हुई थी। जिसको बेवफा बताया गया था, लेकिन आज हम आपको वाराणसी के एक ऐसे सोनम से मिलाने जा रहें हैं। जिसके प्यार की कोई सानी नहीं है। प्यार भी किसी इंसान से नहीं बेजुबानों से। कहीं कोई भी असहाय जानवार हो बस इस बात की खबर सोनम के कानों तक पहुंचनी चाहिए, फिर क्या न दिन, न रात, न धूप, न बरसात निकल पड़ती हैं उसकी मदद को।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से बीकाॅम द्वितीय वर्ष की छात्रा सोनम ने असहाय पशुओं के सेवा की चाह की के दम पर अकेले ही चल पड़ी थी मंजील की ओर। लोगों के जुड़ने के साथ उनकी राह आसान हो गई। आज सोनम के पिछे लोगों का एक कारवां खड़ा हो रहा है बीकॉम की छात्रा सोनम कुमारी के पीछे। हड़हासराय की रहने वाली सोनम बेजुबान जानवरों की सेवा के जुनून से भरी हैं। सुबह-शाम, दिन-रात किसी वक्त उन्हें सूचना भर मिल जानी चाहिए कि कोई कुत्ता, बंदर, गाय, सांड, बकरी घायल है। फिर सोनम नहीं रुकतीं।

सड़क पर घायल कुत्ते के बच्चे को देखकर लिया था सेवा का संकल्प

अखबार बेच कर परिवार पालने वाले शोभन राम की बेटी सोनम ने जीव-सेवा की शुरुआत चार साल पहले अपने ही घर के दरवाजे पर एक घायल कुत्ते के उपचार से की थी। इसके बाद सोनम ने यह संकल्प ले लिया था कि किसी प्रकार के असहाय जनवरों की सेवा का उनका रास्ता कोई मुश्किल नहीं रोक सकता है। उसके बाद यही उनका जुनून हो गया। परिवार के विरोध के बाद भी वह अपने काम में रमी रहीं। अपनी जरूरत के खर्चों में कटौती कर बचत के पैसों से जानवरों के लिए दवाएं खरीदती रहीं। बेटी के काम की प्रशंसा बाहर वालों के मुंह से सुनने के बाद परिवार के अन्य सदस्य भी सोनम का साथ देने लगे। 

साथियों और सीनियरों का सहयोग लाने लगा रंग

इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद सोनम ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बीकॉम में प्रवेश लिया। विश्वविद्यालय में के नए दोस्तों और सीनियरों का भी साथ उनकी मुहिम को मिलने लगा। उनके काम में हाथ बंटाने के साथ दवाओं के लिए जरूरी खर्च में भी हिस्सेदार बनने लगे। मौजूदा समय में तान्या, रोहित, मधु,आजाद, निशी, सत्यम्, मंटू, मनाली और अलका उनकी टीम में शामिल हैं।

दिवाली की रात, बिती असहाय पशुओं के साथ

परिजनों के साथ त्योहार मनाना किसको पसंद नहीं है। लेकिन सोनम के जज्बे के आगे सब फिका। दिवाली की रात एक ओर जहां हर कोई अपने परिजनों के साथ त्योहार की खुशियां बाटंने में जुटा हुआ था। वहीं सोनम अपने युवाओं की टोली के साथ असहायों के सेवा में। अस्सी से लेकर राजघाट तक के इलाको में कुत्तों को खाना खिलाया। पिल्लों के लिए दूध के पैकेटे लेकर गए थे। यह टोली अपने साथ लइया के पैकेट भी ले गई थी जिसका वितरण फुटपाथ पर जीवन गुजारने वाले गरीबों के बीच हुआ। यह सारी सामग्री सोनम की टीम ने अपनी पॉकेट मनी से जुटाई।
 



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