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शराब के नशे में खुंखार हो जाते थे ये अपराधी, ये हुआ अंजाम

शराब के नशे में खुंखार हो जाते थे ये अपराधी, ये हुआ अंजाम

अनुराग श्रीवास्तव। काशीलाइव

शराब के नशा अच्छे से अच्छा आदमी को बेअंदाज बना देता है और जब बात अपराधियों की आती है तो वो किस हद तक जा सकते हैं यह अंदाजा आप लगा सकते हैं। बनारस समेत पूर्वांचल में ऐसे ही कुछ अपराधी थे जो शराब के नशे में खुंखार हो जाते थे। एक बार नशा चढ़ गया तो वह किसी को भी गोली मार सकते थे। यहीं नहीं अधिकतर वारदातों को भी यह शराब के नशे में बेअंदाज होकर ही अंजाम देते थे। उन अपराधियों का अंत भी उसी तरह हुआ। कोई पुलिस की गोली का शिकार हुआ तो कोई अपने बेअंदाजी में ही गैंगवार में मारा गया। आइयें आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही अपराधियों की कहानी।

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बृजेश को देने लगा था चुनौती

पहले माफिया और अब माननीय बने बृजेश सिंह का एक समय पूर्वांचल पर दबदबा था। मुख्तार से अदावत चरम पर थी। इस दौरान मुन्ना बजरंगी मुख्तार के गुट में था और बजरंगी के दो शूटर हुआ करते थे। यह शूटर थे सीरगोवर्धन का रहने वाला बाबू यादव और मच्छोदरी का रहने वाला अन्नू त्रिपाठी। दोनों ही जब शराब के नशे में होते थे तो खुंखार हो जाते थे। अपनी बेअंदाजी के कारण इन्होंने कम समय में ही जरायम की दुनिया में तेजी से सीढ़ी चढ़ी। एक समय हालत यह हो गयी कि उस समय फरार चल रहे बृजेश सिंह के क्षेत्र में अन्नू त्रिपाठी हस्तक्षेप करने लगा था। अन्नू और बाबू ने बेअंदाजी में ही वर्ष बजरंगी गैंग के ही सभासद बंशी यादव की जिला कारागार की गेट पर वर्ष 2004 में हत्या कर दी थी। इसके बाद अन्नू त्रिपाठी पकड़ा गया था और कुछ समय बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने वाराणसी जिला जेल के बैरक में ही गोलियों से छलनी कर उसकी हत्या कर दी। 

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चढ़ी शराब तो पहुंच गया बृजेश को मारने

अन्नू त्रिपाठी के मारे जाने के बाद अकेला बचा बाबू यादव कंट्रोल से बाहर हो गया। शराब के नशे में वह 30 जुलाई 2008 को अपने दो सहयोगियों के साथ सिद्धगिरी बाग स्थित बृजेश सिंह के आवास पर बृजेश को मारने पहुंच गया। फायरिंग के दौरान बृजेश के सुरक्षाकर्मी ने बाबू यादव को गोली मार दी। वह मौके पर ही मारा गया था। इसके बाद बाबू यादव के साथ बृजेश के घर हमले में शामिल दोनों बदमाशों को सिगरा पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। 

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अपने साथी की ही गोली का शिकार हो गया कुख्यात रईस बनारसी

रईस बनारसी एक समय पुलिस के सिरदर्द था, पुलिस उसको पकड़ने की कितने भी प्रयास क्यों ना कर ले वह हर बार चकमा देने में कामयाब हो जाता था। शराब के नशे में रईस बनारसी भी बेअंदाज और खुंखार हो जाता था। 14 सितंबर 2018 को रईस बनारसी व दीपक वर्मा शराब पीने के बाद ही दशाश्वमेध में राकेश अग्रहरि की हत्या करने निकल गया था। पतालेश्वर स्थित आवास के पास राकेश अग्रहरि बैठा था। रईस को शक था कि उसके खास प्रभु साहनी की हत्या में राकेश अग्रहरि शामिल था। पुलिस सूत्रों के अनुसार रईस ने बाइक से उतरते ही राकेश से कहा था कि अब तेरा अंत आ गया है। इतना सुनते ही राकेश ने कहा कि मौत तो तेरी आयी है और राकेश ने असलहा निकाल कर रईस पर फायरिंग कर दी। राकेश की गोली से रईस व दीपक वर्मा दोनों ही घायल हो गये। राकेश की गोली फंस गयी थी। इसी बीच दीपक वर्मा ने राकेश से असलहा छीन लिया और फायर करके उसे मार दिया। रईस को गर्दन में गोली लगी थी। वह अपने खास मुमताज के पास जाना चाहता था। इसलिए इनामी बदमाश दीपक वर्मा के साथ वह नई सड़क पहुंचा। दीपक ने रईस को वहीं पर छोड़ दिया। इसके बाद दीपक वर्मा बाइक लेकर चला आया। घायल रईस लगातार मुमताज को बुलाने की बात करता रहा और थोड़ी देर में उसका अंत हो गया। बाबू यादव की तरह ही रईस भी बेअंदाजी में मारा गया।

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शराब के नशे में पहुंचा पूर्व पार्षद की हत्या करने

रईस बनारसी के साथ कई सनसनीखेज हत्याओं को अंजाम देने वाला नदेसर के राजाबाजार का रहने वाला राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा भी शराब के नशे में खुंखार और बेअंदाज हो जाता था। दोनों हाथों से पिस्टल से गोलियां चलाने में माहिर राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा अपने साथी शातिर बदमाश आबिद सिद्दकी के साथ शराब के नशे में धुत होकर मिंट हाउस पर सपा के पूर्व पार्षद विजय जायसवाल की हत्या करने पहुंच गया था। यहां पर दोनों ने अंधाधुंध फायरिंग की और पार्षद के कर्मचारी की हत्या कर दी। शराब के नशे में ही धुत होकर यह दोनों जगतगंज पहुंचे थे। पुलिस ने रोका तो उन पर भी पिस्टल तान दी लेकिन गोली समाप्त हो जाने के कारण पकड़े गए। 

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सनी गैंग के अपराधी भी शराब के नशे में रहते थे धुत

एक समय हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी की वारदातों को सनी सिंह और उसके गैंग के अपराधियों ने अंजान देकर पुलिस के लिए चुनौती खड़ा कर दिया था। इस गैंग का लीडर सनी सिंह हो या उसके शातिर अपराधी मोनू चौहान और रोशन उर्फ किट्टू। यह सभी शराब के नशे में बेअंदाज हो जाते थे और वारदातों को अंजाम देते थे। यह पुलिस हो या आम आदमी किसी पर गोली चलाने से परहेज नहीं करते थे। जब इनका अपराध पुलिस के बर्दाश्त से बाहर हो गया तो पुलिस ने इन्हें एनकाउंटर में ढेर कर दिया। सबसे पहले वर्ष 2015 में सनी सिंह का एनकाउंटर एसटीएफ ने किया। फिर इसके गैंग के मोनू चौहान और रोशन उर्फ किट्टू का एनकाउंटर बीते एक सप्ताह में वाराणसी पुलिस ने कर दिया।
 



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