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बुझल बबुआ क ललटेन, खिलल कमल

बुझल बबुआ क ललटेन, खिलल कमल

मोदी मैजिक-

मोदी और आधी आबादी ने दिलाई नीतीश को सीएम की कुर्सी

रोजगार के मुदृदे पर भारी पड़ा शराबबंदी का निर्णय, साइलेंट वोटरों ने लालटेन युग के बजाय विकास को दी तवज्जो

युगसत्य/काशीलाइव । वाराणसी

बिहार चुनाव को लेकर तमाम राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों और एग्जिट पोल का डंका पीटने वालों को तकिये के नीचे मुंह छिपाने पर मजबूर कर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र सबका साथ सबका विकास पर बिहार की जनता ने मुहर लगाते हुए नीतीश कुमार के चौथी बार की कुर्सी पर बैठाने की राह आसान कर दी है। यह पीएम मोदी का ही चमत्कार था कि एक सीट का अंतर पड़ गया वरना बिहार में सबसे बडे़ दल के रुप में सामने आया है। जदयू से अधिक 74 सीटें भाजपा के खाते में आई है।   

बिहार चुनाव में एक तरफ लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव महागठबंधन का चेहरा बनकर चुनावी रण की कमान संभाले थे तो दूसरी तरफ नीतीश। रोमांचक कड़े मुकाबले के बाद आखिरकार नीतीश कुमार अपना आखिरी चुनाव बचाने में कामयाब हो गए। 125 सीटों के साथ बिहार में फिर एक बार एनडीए की सरकार बनने वाली है। 

सत्ता विरोधी लहर के बाद भी राजग ने हर चुनौती की पार-

बिहार में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को अपने कार्यों के बूते नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए ने बिहार में बहुमत का जादुई आंकड़ा पा लिया। सत्तारूढ़ गठबंधन यानी एनडीए ने बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत हासिल की। राजद महागठबंधन ने 110 सीटें जीतीं। 

पांच साल पहले जैसी सफलता नहीं आई हाथ-

बिहार में इस बार नीतीश के लिए चुनाव आसान नहीं था। नीतीश को खुद इस बात का इल्म था कि चुनौती तगड़ी है। इस बार उनकी पार्टी जदयू को पांच साल 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है। जदयू को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं। उस समय नीतीश कुमार लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरे थे। 

तेजस्वी बने खतरे की घंटी- 

लालू के बेटे तेजस्वी बिहार चुनाव में एक बड़े युवा नेता के रुप में उभर कर सामने आए हैं। बिहार के युवाओं की एक बड़ी टोली तेजस्वी के साथ दिख रही थी। युवाओं के बूते तेजस्वी ने राजद के नाम 75 सीटें करके सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में सामने लाया है। भाजपा 74 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। तेजस्वी के मुकाबले लोजपा का चिराब बुझा-बुझा नजर आया। हालांकि जदयू को चिराग पासवान के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू का खेल बिगाड़ा। 

किसे-कितनी सीटें

भाजपा की 74 और जदयू की 43 सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझीदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को चार सीटें मिलीं। विपक्षी महागठबंधन में राजद को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में एआईएमआईएम ने पांच सीटें और लोजपा एवं बसपा ने एक-एक सीट जीती है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है।

वामदलों का उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन 

बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल तीन प्रमुख वाम दलों- भाकपा (माले), भाकपा और माकपा- ने कुल 29 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाकपा (माले) ने 19, भाकपा ने छह और माकपा ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में इन तीनों दलों में से सिर्फ भाकपा(माले) को तीन सीटें मिली थीं। साल 2010 में भाकपा सिर्फ एक सीट जीती थी।

रोशन नहीं हुआ चिराग

एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरी चिराग की लोजपा एक सीट ही जीत पाई है और इस तरह वह सियासी परिदृश्य से बाहर हो गई है। कुल 135 सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार उतारे थे, मगर बिहार में चिराग रोशन नहीं हो सका। ठीक इसी तरह बिहार चुनाव से पहले खुद को विज्ञापन के जरिए राज्य का अगला मुख्यमंत्री बताने वालीं पुष्पम प्रिया की दोनों सीटों पर बुरी हार हुई है। बिस्फी विधानसभा सीट और बांकीपुर सीट से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है। 

कद्दावर नेता भी नहीं बचा पाए कुर्सी- 

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के विश्वासपात्र भोला यादव क्रमशरू दरभंगा जिले के केवटी और हायाघाट सीटों पर अपने निकटतम भाजपा प्रतिद्वंद्वियों से हार गए हैं। सिद्दीकी केवटी सीट से भाजपा के मुरारी मोहन झा से 5267 वोटों के अंतर से हारे। वहीं भोला यादव को हायाघाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के राम चंद्र प्रसाद ने 10252 वोटों के अंतर से हराया।

बिहार ने दुनिया को पढ़ाया लोकतंत्र का पाठ-

बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि बिहार ने दुनिया को फिर बताया है कि लोकतंत्र को मजबूत कैसे किया जाता है। पीएम ने कहा कि बिहार के हर वर्ग ने एनडीए के मूल मंत्र पर भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, बिहार के गांव-गरीब, किसान-श्रमिक, व्यापारी-दुकानदार, हर वर्ग ने एनडीए का साथ दिया। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मूल मंत्र पर भरोसा जताया है। मैं बिहार के हर नागरिक को फिर आश्वस्त करता हूं कि हर व्यक्ति, हर क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए हम पूरे समर्पण से निरंतर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, बिहार ने दुनिया को लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाया है। आज बिहार ने दुनिया को फिर बताया है कि लोकतंत्र को मजबूत कैसे किया जाता है। रिकॉर्ड संख्या में बिहार के गरीब, वंचित और महिलाओं ने वोट भी किया और आज विकास के लिए अपना निर्णायक फैसला भी सुनाया है।

महिलाओं को कमतर आंका, बिगड़े बोल ने भी बिगाड़ा काम-

महागठबंधन ने बिहार चुनाव के दौरान पूरे समय युवाओं पर फोकस रखा। जंगलराज चलाने, खुद पढ़ाई से कोसों दूर रहने वाले नेताओं ने दस लाख नौकरी का वादा कर दिया। राहुल और अन्य विरोधी दलों ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर रखा। जबकि भाजपा और एनडीए में शामिल दल का पूरा फोकस बिहार की महिलाओं पर था। शराबबंदी को लेकर राजद को उम्मीद थी कि बड़ा तबका उनके साथ आएगा लेकिन हुआ विपरीत। शराबबंदी के वादे के चलते इस बार भी महिलाएं मजबूती के साथ मोदी और नीतीश के साथ डटी रहीं। 

यूपी में योगी की मची धूम-

बिहार के चुनाव में स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में हो रहे उप चुनाव की भी जिम्मेदारी थी। मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश में एक तरफ कोरोना को काबू में किया तो दूसरी तरफ बिहार में विरोधियों के साथ-साथ यूपी के चुनाव को भी साधा। यूपी में योगी के कामकाज पर जनता ने मुहर लगाई और सात में से छह सीट भाजपा की झोली में डाल दी। दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों के बूते अपना राजनीतिक वजूद खोज रही कांग्रेस को एक सीट नसीब नहीं हुई। हालांकि सपा अपनी एक सीट बचाने में कामयाब रही। जौनपुर के मल्हनी सीट से सपा के लकी यादव ने बाहुबली धनंजय सिंह को पटखनी दी।
 



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